Friday, July 14, 2006

बम्बई के बम्ब

3 दिन हुए जब आतंकवादियों ने मुम्बई को फिर से निशाना बनाया. और इस बार उन्होंने काफी आसान सा लक्ष्य चुना, महानगर की जीवन रेखा, यानि स्थानीय रेल को.

ज़िन लोगों को इस रेल के सफर का अनुभव नहीं है, उनके लिये ये अनुमान लगाना लगभग असंभव ही है कि कैसे मुम्बई वासी हर रोज भेड़ बकरियों के जैसे इस रेल में ठूंसे जाते हैं. मुझे स्वंय इस नरक का 3 महीने का अनुभव है 1999 में, और उन दिनों मैं हर रोज अपने जीवन को कोसता था कि आखिर क्यों मैं भी इस का भागीदार हूं. मुझे अच्छे से याद है वो दिन जब मैं चर्चगेट से पवई अपने एक दोस्त को मिलने निकला था और दादर पहुंचकर मुझे गाड़ी बदलनी थी, मगर तब तक मेरी हालत पतली हो गई थी खुद को एक इंसानी समुंद्र में देख कर. मैं वापिस लौट चला और अपने मित्र को सिर्फ दूरभाष से ही कहला भेजा कि मुलाकात मुमकिन नहीं है. वाह री मुम्बई नगरिया!

खैर भगवान ने मेरी सुन ली और मुझे इस नरक से छुटकारा मिला. कभी कभी मैं जब वो गाना सुनता हूं .. "बम्बई से आया मेरा दोस्त, दोस्त को सलाम करो" ... तो सचमुच यादें ताजा हो जाती हैं और मैं सोचता हूं कि हर मुम्बई वासी सचमुच सलाम का हकदार है. अगर मेरा बस चले तो मैं उन्हें परमवीर चक्र से नवाजूं !! आखिर एक सैनिक तो सिर्फ एक दिन बहादुर की तरह अपनी जान पर खेल कर देश की सेवा करता है किंतु एक आम मुम्बई वासी तो हर दिन एक भयानक मौत से जूझता है.

हां, अभी के बम्ब धमाकों की बात करें तो मेरे एक मित्र खुन्दक ने ठीक ही लिखा है कि शायद मुम्बई वासियों के पास शांत रह कर अपने काम पर चल पड़ने के अलावा कोई दूसरा चारा भी न रहा होगा.
http://saintssangat.blogspot.com/2006/07/booom-blaa-in-light-of-current.html

मेरा विचार भी कमोबेश यही है कि ये इस शहर की सभ्यता का कोई बड़प्पन वगैरा नहीं है कि कोई खास हंगामा नहीं हुआ और लोग शांत रहे व इस हादसे को समुदायिक या राजनीतिक रंग न देते हुए फिर से अपने जीवन की आपाधापी में शामिल हो चले.

मगर इतना तो मानना ही पड़ेगा कि मीडिया के ज्यादा ध्यान देने से शिवसेना (और कुछ हद तक भाजपा भी) जैसे दलों को समझ आई है कि दंगा भड़कवाने से उनके वोट बढने के बजाय घटने का ज्यादा अंदेशा है. हां इन दलों के कुछ समझदार लोगों को ये भी शायद समझ आया हो कि राष्ट्रहित दलहित से ज्यादा बडा है, हालांकि मुझे इस बात की उम्मीद कुछ ज्यादा नहीं है.

चलो अच्छा है, देर आयद दुरुस्त आयद.

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