मेरा पहला हिन्दी चिट्ठा
मेरे एक दोस्त, जो अपने आप को खुन्दक के नाम से पुकरवाना चाह्ता है, ने मुझे हिन्दी में टाइप करने का रास्ता दिखाया. हां कुछ कीमत तो हमेशा देनी ही होती है किसी भी नई चीज को सीखने की, सो मुझे भी एक लंबा चौड़ा लेख संस्कृति पर पढना पड़ा खुन्दक जी का.
खैर किसी तरह झेल लिया और मेरा हिन्दी में टाइप करने का शौक फिर से जग गया . इससे पहले मैं एक ऋषिकेश के किसी आश्रम द्वारा दिया गया एक सॉफ्टवेयर प्रयोग किया करता था किंतु उस से सीधा नैट पर लेख प्रकाशित करना सम्भव न था क्योंकि एक फाँट को भी अपलोड करना पड़ता
ये पहला अभ्यास यहीं समाप्त करता हूं. बाकि बाद में कभी.
खैर किसी तरह झेल लिया और मेरा हिन्दी में टाइप करने का शौक फिर से जग गया . इससे पहले मैं एक ऋषिकेश के किसी आश्रम द्वारा दिया गया एक सॉफ्टवेयर प्रयोग किया करता था किंतु उस से सीधा नैट पर लेख प्रकाशित करना सम्भव न था क्योंकि एक फाँट को भी अपलोड करना पड़ता
ये पहला अभ्यास यहीं समाप्त करता हूं. बाकि बाद में कभी.

1 Comments:
kya hai bhai ye....
isse to remove hi kar do apna blog kaoi aur hi use kar lega.
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